:
Breaking News

Bihar News: ईंट भट्ठा मालिकों को बड़ी राहत, बकाये के ब्याज पर छूट के साथ वन टाइम सेटलमेंट योजना मंजूर

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार कैबिनेट ने ईंट भट्ठा मालिकों के पुराने बकाये के निपटारे के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत ब्याज की राशि छोड़कर मूल राशि जमा करने का प्रावधान है।

पटना, 15 सितंबर 2026, Alam Ki Khabar। बिहार सरकार ने ईंट भट्ठा कारोबार से जुड़े मालिकों को पुराने बकाये के मामले में बड़ी राहत देने का फैसला किया है। बिहार कैबिनेट ने खान एवं भूतत्व विभाग के बकाये के निपटारे के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के दायरे में वित्तीय वर्ष 2024-25 तक विभाग का बकाया रखने वाले ईंट भट्ठा मालिकों को राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से लंबित बकाये की वसूली को आसान बनाना और पुराने मामलों का निपटारा करना है। योजना के तहत बकाये की राशि में शामिल ब्याज को छोड़कर मूल राशि जमा करने का प्रावधान किया गया है। यानी पात्र ईंट भट्ठा मालिक निर्धारित मूल बकाया राशि जमा कर अपने लंबित मामले को समाप्त कराने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकेंगे।

ब्याज की राशि से मिलेगी बड़ी राहत

ईंट भट्ठा कारोबारियों के लिए इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ब्याज की राशि में राहत है। पुराने बकाये के साथ ब्याज जुड़ने के कारण देनदारी बढ़ती चली जाती है। ऐसे मामलों में सरकार ने अब वन टाइम सेटलमेंट के जरिए ब्याज की राशि छोड़कर मूल राशि जमा करने का अवसर देने का निर्णय लिया है।

इससे उन कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पुराने बकाये का भुगतान करने में परेशानी का सामना कर रहे थे। हालांकि योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित निर्धारित शर्तों और प्रक्रिया के तहत मूल राशि जमा करनी होगी।

मूल राशि जमा होने के बाद क्या होगा

वन टाइम सेटलमेंट योजना के तहत संबंधित देनदार द्वारा निर्धारित मूल राशि जमा किए जाने के बाद मामले के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद नीलाम पत्र पदाधिकारी की ओर से यह रिपोर्ट किए जाने का प्रावधान है कि संबंधित देनदार के ऊपर अब कोई लोक मांग बकाया नहीं है।

इस रिपोर्ट के आधार पर लंबित नीलाम पत्रवाद के निस्तारण का रास्ता साफ हो जाएगा। इस तरह बकाये की मूल राशि जमा करने के बाद पुराने लंबित मामलों को प्रशासनिक स्तर पर समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

तीन महीने की होगी योजना

बिहार सरकार की ओर से स्वीकृत वन टाइम सेटलमेंट योजना की अवधि तीन महीने निर्धारित की गई है। यानी पात्र ईंट भट्ठा मालिकों को इसी निर्धारित अवधि के दौरान योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

तीन महीने की समय सीमा के कारण संबंधित कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वे अपने बकाये और योजना के तहत देय मूल राशि की जानकारी लेकर समय रहते भुगतान की प्रक्रिया पूरी करें। योजना की अवधि समाप्त होने के बाद पुराने बकाये के मामलों में सामान्य प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की स्थिति अलग हो सकती है।

सरकार को भी मिलेगा राजस्व का लाभ

सरकार के इस फैसले को केवल कारोबारियों को राहत देने के कदम के रूप में ही नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इससे सरकारी राजस्व की वसूली में भी तेजी आने की उम्मीद है। लंबे समय से लंबित बकाये की मूल राशि यदि निर्धारित अवधि में जमा होती है तो सरकार को कम समय में राजस्व प्राप्त होगा।

इसके साथ ही नीलाम पत्र के पुराने मामलों के निस्तारण से विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम हो सकता है। सरकार को उम्मीद है कि वन टाइम सेटलमेंट के माध्यम से पुराने बकाये की वसूली और मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति मिलेगी।

ईंट भट्ठा कारोबारियों में राहत की उम्मीद

ईंट भट्ठा उद्योग से जुड़े कारोबारियों के लिए पुराने सरकारी बकाये का मामला लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहा है। बकाया राशि पर ब्याज बढ़ने के कारण कई मामलों में देनदारी लगातार बढ़ती जाती है। ऐसे में मूल राशि जमा करने और ब्याज से राहत मिलने की व्यवस्था कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब योजना के लागू होने के बाद संबंधित ईंट भट्ठा मालिक अपने लंबित बकाये के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा के भीतर कार्रवाई कर सकेंगे। इससे पुराने मामलों को खत्म कराने और कारोबार से जुड़े वित्तीय दबाव को कम करने का अवसर मिल सकता है।

क्या है वन टाइम सेटलमेंट का सीधा फायदा

इस योजना का मूल उद्देश्य पुराने बकाये का एकमुश्त निपटारा कर लंबित मामलों को समाप्त करना है। पात्र ईंट भट्ठा मालिकों को ब्याज की राशि से राहत देते हुए मूल राशि जमा करने का अवसर मिलेगा। मूल राशि जमा होने के बाद नीलाम पत्र पदाधिकारी की रिपोर्ट और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर नीलाम पत्रवाद के निस्तारण की कार्रवाई की जाएगी।

इस फैसले से जहां ईंट भट्ठा कारोबारियों को पुराने बकाये के मामले में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं सरकार को भी लंबित राजस्व की मूल राशि की वसूली का रास्ता आसान होने की संभावना है।

बिहार कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि योजना का लाभ लेने के लिए विभाग की ओर से क्या विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं और कितने ईंट भट्ठा मालिक निर्धारित तीन महीने की अवधि में इसका लाभ लेते हैं।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *